बुधवार, 31 मार्च 2010

क्रान्तिकारी बना दिया (Dedicate on 31 March)

क्रान्तिकारी बना दिया
- Kaushalya

क्यों जिंदगी सरल नहीं होती,
क्यों अपने अधिकार हक़ से नहीं मिलते,
जीवन की आपाधापी (Onslaught) ने आज,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया।
?
ये संघर्षमय जीवन ने हमे,
हर कदम अस्तित्व के लिए ,
लड़कर जीना सिखा दिया,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया।
?
यही है वास्तविकता जीवन की,
ना मिले माँगने से तो,
छिन कर जीना सिखा दिया,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया
?
क्या जिंदगी का दस्तूर है ऐसा,
सीधे मनुज हो उनको ही सताना,
अन्याय और धोखे ने आज,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया।
?
जहाँ धरा है मौन हमने,
वहीँ पर गुनहगार ठहरा दिया,
न्याय मिलने की जिज्ञासा ने,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया।
?
क्या कहे अंतर विषाद को,
जिंदगी की ठोकरों ने आज,
ज़माने की नज़रों में,
क्रान्तिकारी बना दिया।
? ? ?
(यह रचना मन: क्रांति पर आधारित है)

सोमवार, 29 मार्च 2010

कब आयेगा वो दिन..(When that day comes..)

कब आयेगा वो दिन..
- Kaushalya
कब आयेगा नवोदित सूरज..
चारों ओर प्रसरेगी शांति..
न रहेगा कोई बैरी-दुश्मन..
न रहेगी अंतर की आग (Jealousy)..
चारों ऋतुएं होंगी सुख से भरपूर..
न रहेगा कोई वाणी-विग्रह..
कब होगा सुनहरा हर पल..
जहाँ होगी स्नेह की संपत्ति..
जहाँ हो मानवता का भाईचारा..
कब होगी सफलता से प्रगति..
कब होगा ऐसा..
भूखे पेट ना सोयेगा कोई..
महंगाई का होगा ना मार..
कब होगा पैसों के मूल्यों का क्षय..
कब होगी पुरुषोत्तम की पूरी परिकल्पना..
कब आयेगा वसुधैव कुटुम्बकम का राज..
कब मिटेगी मन् की मलिनताएँ..
कब मिटेगा धार्मिकता के नाम का पाखंड..
कब होंगे सब धर्म एक समान..
..जहाँ..
ना रहेगा कोई ऊंच-निच का भेद..
ना होंगे दंगे-फसात का खेल..
ना होगा अन्याय किसीसे..
..जाने..
कब होगा नव युग का निर्माण..
कब होगा यह स्वप्न साकार..
कब आयेगा नव सूरज..
आह्ह्ह...
आखिर, कब आयेगा वो दिन..
,...

बुधवार, 24 मार्च 2010

राम के अनुरागी.. (रामनवमी)

राम के अनुरागी.. (रामनवमी)
- Kaushalya
राम मेरे मन में बसनेवाले है..
मेरे हर रोम में राम समाये है..
मेरे जीवन सहारे राम है..
मेरे दर्पण और अर्चन राम है..
मेरी जिह्वा भी 'राम' नाम ही रटती है..
अनुलोम-विलोम होनेवाली साँसें भी राम है..
मेरे शक्ति और स्मरण राम है..
मेरी भक्ति और भरोसा राम है...
मेरा हर कर्म राममय है..
दीवाने है राम नाम के..
सुख-दुःख नहीं रहा अब तो..
हरख-शोक भी नहीं है..
राममय हो गया है सबकुछ..
उपवन बन गए है राम के..
नहीं रहा अब क्रोध किंचित मात्र..
हर लिया है सबकुछ राम नाम ने..
राम ने मुक्त कर दिया संसार से..
सार्थक हो गया जनम..
निर्मल हो गए निर्गुण को पाकर..
कैसे कहे महिमा राम नाम की..
अनंत है परमानन्द की गुणगाथा..
कैसे कहे अनुभव राम नाम का..
एक बार राम नाम प्रयोग कर देखें,
खुद-ब-खुद परिचित हो जायेंगे...
राम नाम है अति मंगलकारी..
'जय श्री राम'
*

शनिवार, 20 मार्च 2010

बेटियाँ (20 March Daughter Day)

बेटियाँ (२० मार्च बेटियाँ दिवस)
- Kaushalya
नन्ही सी कली होती है बेटियाँ..
फूलों जैसी कोमल होती है ये..
कभी दादा जी की लाडली..
तो कभी पापा की परी,
माँ की दुलारी होती है,
तो कभी..
भैया की नन्नी सी राजकुमारी,
बहन की सखी होती है..
तो कभी सहेलियों की प्यारी..
बेटियाँ चहकती हुई चिड़ियाँ है,
जिसकी चहक से आँगन गूंज उठता है..
उसकी बोली से,..
खुशियों की बरसात होती है..
बेटियाँ हमारा ह्रदय होती है..
जिसे देखकर मन आत्मतृप्त होता है..
ऐसी होती है बेटियाँ..
*

शुक्रवार, 12 मार्च 2010

पल भर का 'इन्तज़ार'

पल भर का 'इन्तज़ार'
- Kaushalya

इंतज़ार करे कोई,...
ये गवारा नहीं हमे..
यूँ तो इन्तज़ार में,..
इन्तेहाँ हो जाती है,..
ख़ामोश सब्र की..
इक पल भी देर हो जाए,..
गर वक़्त के तकाज़े की..
बेचेन कर देती है,..
पल भर के लिए..
मचल उठता है जिया,..
आ जाती है ओट,..
जस्बातों के बाँध पर..
इंतज़ार की ये घडी,..
लगती है बड़ी भारी..
कैसे बचे कोई,..
इसके सितम से..
या तो कहीं,..
जाता लम्हा थम सा जाए..
या तो फिर,..
आनेवाले आ जाए..
तब होगी ख़त्म ये,..
'इन्तज़ार' की लड़ी..
*

गुरुवार, 11 मार्च 2010

रूठे दोस्तों को..

रूठे दोस्तों को..
- Kaushalya

ए दोस्त ........
दोस्तों से यूँ रूठा नहीं करते....
यूँ दोस्ती को हरदम आज़माया नहीं करते...
सच्ची दोस्ती मिलती है नसिब वालों को...
हर कदम यूँ किश्मत आज़माया नहीं करते...
यूँ तो कहने के दोस्त तो मिल जाते है कई,
हजारों मोड़ है जिंदगी के रास्ते में ......
जिंदगी के ये हँसीन अनमोल पल को
यूँ दोस्तों से रूठ कर गवाया नहीं करते..
जो मिला है उसे खुदा कि नेमत समझना...
मन्नते करने से भी नहीं मिलती दोस्ती..
कभी दिल्लगी ना करना ... आज़माईश कि..
पतझड़ के पत्तो कि तरह बिखर जाएगी..
लाख कोशिषे करलो फिर..
दुर्लभ है ये..
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