सोमवार, 29 जून 2009

कश्मकश है क्या लिखू (For Blessing)

कश्मकश है क्या लिखू
- Kaushalya
लिखू तो मैं क्या लिखू ,
तुम्हारे नाम......
ये खुला आश्मान लिखू ,
या तारो से झग-मगाती हुई रात लिखू....
फूलो की महक लिखू ,
या हवाओं की रवानी लिखू....
तुम्ही कहो अब मैं क्या लिखू....
सोचा है की,....
सूरज की पहेली किरण का सलाम लिखू,
देखो तुम्हारी राह में,.....
इन्तज़ार करते हुए पहाडों की मृदंग नाद लिखू,
किल-किलाहत करती हई नदियों की मुस्कान लिखू,
या समन्दर की गहेरायी लिखू,
मौसम में तुम्हारे आने की खुशबु का पयाम लिखू,
या तितलियो का मेघ-धनुषी रंग लिखू....
उषा के फैले आशमान में,
रंग-बे-रंगी रंगों की सौगात लिखू,
या चाँद की रोशनी से बनी हुयी आभा लिखू....
देखो ना,....
आदित्य की कुंदन जैसी किरण,
जैसे सृष्टि में नवचेतना भर देती है,
वैसे ही,......
आज का ये दिन जीवन में नव-पल्लवित सवेरा लाये....
~*~*~*~*~*~

Who is God , What is his identity

[1]
God Means Endless Why
- Kaushalya
The God's power existence or not ....
There comes a voice from inside ....
I do not know that.
what people are think,
We thinking that
However ....
We do not deny his presence ....
Because, They do makes Feeling
Realize is alive in us.
I do not know who is the Head of the world,
who handles the reins of the government ....
why is They get a realize of focus.
When we have not seen him ... did not hear ...
Yet, why we do not deny his accept existence..
Otherwise, Is happy to accept the selection,
And He is on leave all ...
Why ....
Endless why....
?
________________________
[2]
Platform Of The God
- Kaushalya
Maybe God The waste is in the nature
Our sense is
Wave in the river
Birds singing in the
Is in the soil of the earth
Is in the fragrance of flowers
In light of the moon
The stars twinkle in the
Trees and plants in
Rain drops in
Waving in the field
In the throb of hearts
In the rays of the sun
Maybe God,
All have extensive...
He particles - the particles have spread.
^_^

ईश्वर का अस्तित्व

[1]
ईश्वर का अस्तित्व
- Kaushalya
जहाँ सवाल उठता है की....
ईश्वर की सत्ता की अस्तित्व है भी या नहीं....
वहां अन्दर से एक आवाज़ आती है....
की पता नहीं.
नजाने लोग क्या सोचते है,
हम क्या सोचते है
फिर भी....
हम उसकी मौजूदगी को नकारते नहीं....
क्योकि वो अपनी अनुभूति करवा कर ,
हमारे एहसास में जिन्दा हो जाता है.
पता नहीं....दुनिया किसके नेतृत्व पर चलती है
मालूम नहीं कोन है इसका कर्ता,
कोन संभालता है इसके शासन की बागडोर को....
वो अपनी अनुभूति की प्रतीति क्यों करवाता है.
जब की हमने उसे देखा नहीं...सुना नहीं...
फिर भी हम उसकी हाजरी को नकारते क्यों नहीं...
वरण सहर्ष स्वीकार करते है,
और उस पर ही सब छोड़ देते है...
क्यों....
आखिर क्यों....
*
______________________________________________________
[2]
ईश्वर की पहचान
- Kaushalya
ईश्वर शायद
इस प्रकृति में बसा हुआ है....
हमारी अनुभूतियों में है...
नदियों की लहेरो में है....
गाते हुए पंछियो में है....
धरती की मिट्टी में है....
फोलों की खुशबू में है...
चाँद की रोशनी में है...
तारों की टीम-टीम में है...
पेड़ - पौधों में है....
बारिश की बूंदों में है...
लहराते हुए खेतो में है...
दिलों की धड़कन में है....
सूरज की किरणों में है....
ईश्वर शायद,
सर्व व्यापक है...
वो कण-कण में समाया हुआ है।


*

रविवार, 28 जून 2009

Shama changed little changed this, everything is like new

Shama changed little changed this, everything is like new
- Kaushalya
Where did it come from a change
How come, I do not know
But as it is feeling good
Sound world is changed,
Happiness looks around.
The changes you are seeing
We feel these changes are
Brightness is strange
All Direction,all in the air
Everything is changing.
Is changing the color of the flowers
Everybody is shocked,its that is feel..
Think how it happened,
When these changes
As feel that Stars on the floor ,
And spread the light around
Spread the moon has its moonlight
You also Tell me what felt
These changes ....
Do not know ... What happened to the world,
Or is cheating of our eyes
These changes ....
^_^

बदला बदला सा ये शमा ... सब कुछ है नया सा

बदला बदला सा ये शमा ... सब कुछ है नया सा
- Kaushalya
बदलाव कहाँ से आया....
कैसे आया....पता नहीं....
पर जैसा भी है....अच्छा है.
दुनिया बदली बदली सी लगती है,
खुशियाँ चारो ओर दिखती है.
ये बदलाव....आप भी देख रहे है
हम भी महसूस कर रहे है ये बदलाव
अजीब चमक सी है....
दिशाओ में ...फिज़ाओ में....
बदल रहा है सब कुछ.
बदल रहा है फूलों का रंग
सब हेरान है , ये जो महसूस हो रहा है
सोचते है...ये कैसे हुआ,
कब हुआ.....ये बदलाव....
लगता है ये ....सितारे ज़मीन पर हो,
और चारो ओर फैला उजाला
चाँद ने बिखेर दी अपनी चांदनी
आप भी बताईये क्या महसूस हुआ
ये बदलाव....
ये ज़मीं को ...नजाने क्या हो गया,
या हमारी नजर का धोका है
ये बदलाव....
*_*

Oh God....

Oh God....
- Kaushalya
Oh God,
I want your love
They take that desire,
You are always with me
I need you
Oh God,
So for you to be thousands
You have the same support for me
You do not leave my side
Take hold my hand,

And take me in your lap
Oh God,
This is your world seems like a stranger to me,
I added the relationship with you
You keep me in your shelter
Oh God,
Look there in the world where this
Delusion, deception, and fraud-flam is full
I deal with all this heat,
Is not as much strength in me
Oh God,
You have my support
You have my
Am unable to live without you,
Oh God,
I bring you your
I am dependent only on you
Rescue me from this world

I have hidden in their own.
*

हे इश्वर....

हे इश्वर....
- Kaushalya
हे इश्वर,
मैं चाहू तेरा प्यार
ये तमन्ना रखू कि,
तू रहे हरदम मेरे साथ
मुझे जरुरत है तेरी
हे इश्वर,
तेरे लिए तो होंगे हज़ारों
मेरे लिए तू एक ही है सहारा
तू छोड़ ना न मेरा साथ
हाथ पकड़ ले मेरा ,
और उठाले मुझे अपनी गोद में
हे इश्वर,
तेरा ये संसार लगता है है मुझे अजनबी सा,
मैं तुम्हारे साथ नाता जोड़ लू
तू रखना मुझे अपनी पनाह में
हे इश्वर,
ये संसार में जहाँ देखो वहां
प्रपंच, धोखा, और छल-कपट भरा पड़ा है
मैं इन सब से निपट लू,
उतना सामर्थ्य नहीं है मुझ में
हे इश्वर,
तू ही मेरा एक सहारा है
तू ही मेरा अपना है
तेरे बगैर में जीने में असमर्थ हूँ,
हे इश्वर,
तू अपना ले मुझे
मैं तेरा ही मोहताज हूँ
बचाले मुझे इस संसार से
छुपा ले मुझे अपने आप में ।
*

शनिवार, 27 जून 2009

Treasure of Heart

Treasure Of Heart
- Kaushalya
''Always Keep smiling like these flowers
As the colors of these flowers,
Fill deep color in your life ...
So many obstacle will comes in your ways ...
But you keep smiling like these flowers ....
Being in the thorns do not leave flowers smile
you remain spread like this fragrances of the flower
All their flavor, the mind is happy ....
Even if the person, or God, or any mere creature,
The fragrance of these flowers, like all of the soul is satisfied,
Same as like your "smile"....
Flowers are delicate and soft, so you
Keep your heart's feelings the soft ....
So that whoever you met
That "you" to be ...."
*

मन का खज़ाना

मन का खज़ाना
- Kaushalya

'इन फूलो की तरह मुस्कुराते रहना हर दम....
इन फूलो के रंग जैसा ,
रंग भरना अपनी जिंदगी में गहरा...
काँटे तो अनेक आयेंगे राहों में,
पर आप मुस्कुराते रहना....इन फूलो की तरह....
फूल काँटों में रहकर भी मुस्कुराना नहीं छोड़ते ,
आप इन फूलो की खुश्बू की तरह महकते रहना....
जो सब को अपनी परिमल से , प्रसन्न चित्त करता है ...
चाहे वो इन्सान हो,या परमेश्वर, या कोई भी जीव मात्र,
ये फूलो की महेक,जैसे सब को आत्मा-तृप्त करती है ,
वैसी ही आपकी " मुस्कुराहट " हो....
फूल जैसे नाजुक और कोमल होते है ,वैसे ही आप
अपने ह्रदय की भावनाओ को " कोमल " रखना...
ताकि जो कोई भी आप से मिले
वो " आपका " हो जाये....'

*

अनुरोध (My Insistence For You)

अनुरोध (My Insistence For You)
- Kaushalya
तुम अपना जीवन शुद्ध जीना ,
तुम्हारी राह में जो कोई भी आए,
और मदद का हाथ फैलाये,
तो उसकी मदद करना ऐ दोस्त,
चाहे बस यही एक वादा तुमसे,
दे दो या ठुकरा दो हमारी गुजारिस को,
शिकवा नही करेंगे कोई तुमसे,
ये जीवन है कुंदन जैसा ,
गवाना मत्त उसे, क्योंकि....
कल ये मौका फ़िर मिले न मिले।

~*~

Student Life Is The Golden Period Of Life


Student Life Is The Golden Period Of Life
( विध्यार्थी अपने आप ही अपने भविष्या का निर्माण करे )
विध्यार्थी जीवन , जीवन का सुवर्णकाल है Student Life Is The Golden Period Of Life. कुच्छ सीखने को , कुच्छ बनने का निरंतर प्रयास इस समय मे ही होता है एक विध्यार्थी के क्या लक्षण होते है , यह नीचे के श्लोक मे दिए गये है ------
" काकचेष्टा बकध्यानम श्वाननिंद्रा तथैव च ।
अल्पाहारी गृहत्यागी विध्यार्थी पन्चलक्षम ॥ "
[1] काक (कौआ) चेष्टा :- कौआ दूर आशमान मे स्वच्छंदता से उड़ाता रहता हो फिर भी उसकी तीव्र द्रष्टि द्वारा ज़मीन पर पड़ी हुई कोई खाध्यपदार्थ को देख कर चपलतापूर्वक वहाँ पहुँच जाता है तथा अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेता है। एसे ही विध्यार्थी भी ज्ञान की प्राप्ति के लिए तीव्र जिज्ञासा रखे तथा अपना लक्ष्य को प्राप्त करता जाय ।
[2] बकध्यानम :- बगुला (Heron) तालाब या नदी किनारे एक पैर (Leg) पर खड़ा रहकर ध्यान मग्न रहता है। मछली देखते तुरंत ही उसे झपट कर अपना आहार बनता है , फिर दुबारा ध्यानस्थ मुद्रा मे हो जाता है। विध्यार्थी भी विद्या अध्ययन में लगे रहे तथा ज्ञान-विज्ञान की बातों को ग्रहण करता हुआ निरंतर प्रगति पथ पर बढ़ता रहे।
[3] श्वान निंद्रा :- जिस तरह सोते हुए कुत्ते के पास से धीरे से भी पसार (धीरे से निकलना) होते हो फिर भी वह जाग (उठ जाना) जाता है , इस तरहा विध्यार्थी भी अपना जीवन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सदाय (हमेशा) सावधान और जागरूक (Alert) रहे। एसी निन्द ' सात्विक ' है।
[4] अल्पाहारी :- विध्यार्थी जीवन ' साधना ' और ' तापश्चर्या ' का जीवन है। एक अध्ययनशील विध्यार्थी सदाय सादा सात्विक और अल्पभोजन लेनेवाला होता है। तामसिक , राजसिक और ज़्यादा आहार लेनेवाले विध्यार्थी की जीवन-शक्ति का ज़्यादातर भाग भोजन पचाने मे , नींद , आलस और तन-मन की बीमारियों का सामना करने मे खर्च हो जाता है। विध्यार्थी जीवन की सफलता के लिए स्वास्थ्य के प्राकृतिकनियमो का पालन अति आवश्यक है।
[5] गृहत्यागी :- एक आदर्श विध्यार्थी विध्या प्राप्ति के लिए गृहत्याग मे ही संतोष मानता है। विध्या प्राप्त करना ये एक तप करने जैसा है , नहि के मोज-मस्ती करने जैसा। सुख का त्याग आवश्यक है।
* * * * *
GOD BLESS YOU

साईं बाबा कृपा करना

साईं बाबा कृपा करना
- Kaushalya
राम नाम से पत्थर भी तर जाते है समन्दर में ,
साईं राम नाम से संसार रूपी सागर तर जायेंगे।
एक बार साईं राम नाम का रटन करके तो देख ,
दौडे आयेंगे साईं राम तेरी बिगड़ी बनाने के वास्ते।
एक बार पुकार के तो देख बन्दे ,
साईं नाम आज़मा के तो देख।

* * *