सोमवार, 21 दिसंबर 2009

गुरुजी को समर्पण

गुरुजी को समर्पण
- Kaushalya
गुरूजी को सत् सत् वन्दन
गुरूजी तुज़को समर्पित
मेरा सारा जीवन
गुरूजी तेरे ही हाथों
मेरे जीवन की बागडोर
अब तारे या दुबोदे ये तेरी मरज़ी
गुरूजी मैं करू न शिकवा
जिस पथ ले जाये जाऊँ रे
गुरूजी में तो हूँ तेरी गाय
जैसे चाहे रखे तू
गुरूजी तेरे ही भरोसे
जीवन नैया डाली मझधार
लगदे किनारे या करदे बेडा पार
गुरूजी एक तेरे ही सहारे
ये जीवन नैया पार हो जाये
गुरूजी तू ही मेरी दुनिया
गुरु जी तेरे ही हवाले
मेरा जीवन समर्पण
*

रविवार, 20 दिसंबर 2009

होंशले बुलंद है दोस्त

होंशले बुलंद है दोस्त
- Kaushalya
होंशले बुलंद है दोस्त
चाहे गीर जाए
चाहे ठोकर खाए
चाहे ज़ख्मी हों
फिर भी,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
हर तूफ़ान का करेंगे सामना
कफ़न ये बांध लिया है शर पर
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
डट गए तो फिर से उठेंगे
सँभालेंगे अपना दामन
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
ज़ालिम ज़माने की करेंगे न परवा,
मुँह तोड़ जवाब देंगे उसका
आगे कि ओर कूच कर गए कदम
मुड़ के न देखे दोबारा न नयन हमारे
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
जंग-ए-ऐलान का बिगुल बजा दिया
आजाये जो कोई हो दुश्मन
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
अन्याय और अत्याचार नहीं सहेंगे
चेहरे पर आएगी मुस्कुराहट वापस
करेंगे अपने सपने पुरे
बहारें आयेगी फिर से
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
जल उठी क्रांति की ज्वाला
होगी नवयुग की स्थापना
क्योंकि,
होंशले बुलंद है अपने
नव चेतन से भरा आया
'नवयुग'
*

तूफ़ान-ए-गुस्सा

तूफ़ान-ए-गुस्सा
- Kaushalya
गुस्सा है गुस्सा मेरा,
नहीं है कोई आग,
जिसे पानी से बुझाई जाए
*
नाही ..कोई हवा है
जिसे कैद की जाए,
*
नहीं है रत कोई
जो चाँदनी से शीतल हो जाए,
*
नहीं है नदी का पानी
जो लहरों में बह जाए,
*
नहीं कोई खुश्बू जो,
फ़िज़ाओ में बिखर जाए,
*
और नहीं है कोई गीत
जो गुन-गुना लिया जाए,
*
नहीं कोई दिशा जो
बाँट दिया जाए,
*
ये तो..
तूफ़ान है तूफ़ान
जिसे रोकना मुश्किल ही नहीं
ना मुमकिन भी है,
*
इस आफत पर लिखा गया
तुम्हारा नाम है :X
*
..सावधान..
*
आक्रमण
*

गुरुवार, 17 दिसंबर 2009

प्रेम सुधा

प्रेम सुधा
- Kaushalya
प्रेम क्या है, कुछ भी तो नहीं
सिर्फ एक मीठा एहसास है वो
प्रेम तो अपने आप में पूर्ण है
उसे देखना-समझना मुश्किल है
उसकी पहचान परखने से नहीं होती
प्रेम तो अनुभव करने का नाम है
श्री कृष्ण ने भी अपने जीवन से
प्रेम को जगत का सार कहा है
निर्मल-निश्छल-निस्वार्थ-निरामय
अलंकार है प्रेम रूपी रत्नाकर के
प्रेम से भक्ति के द्वार खुल जाते है
और भक्ति से परमेश्वर की पहचान
परमेश्वर में लीन हो कर जीवात्मा
सुख - दुःख से परे हो जाता है
वह कर्म के बन्धनों से मुक्त हो जाता है
जीवन के अंतिम लक्ष्य की प्राप्ति होती है.
* * *

मंगलवार, 15 दिसंबर 2009

लगता है ऐसा

लगता है ऐसा
- Kaushalya
लगता है ऐसा...
जैसे, ज़मीन रुक सी गयी है...
हम थम से गए है
प्रकृति प्रगति के पथ पर है
ये कैसे हो सकता है !
एक साथ चलनेवाले दोनों
उसमे एक आगे और एक पीछे
कैसे हो सकता है फिर एक
कब हुआ ऐसा ?
जब किस्मत रूठ जाती है
खुशियाँ नजरे चुराती है
ख्वाबों को अग्निदाह लग जाता है
सोच मूक हो जाती है
चित्त चिंता चुरा जाती है
तारामंडल से एक सितारा बिखर जाता है
हर वफ़ा जब बेवफ़ा कहलाती है
मध्याहन में सूरज प्रखरता से जलता है
मोमबत्ती पिघलकर प्रवाही में बह जाती है
पतंगा परवाना बन,
दिये की लौ पर फ़ना हो जाता है
समन्दर की लहरों में जब सुनामी उठती है
फूल शाख से मुरझाकर गिर जाते है
पतझड़ के झोकों में पत्ते बिखर जाते है
लगता है ऐसा मानो..
कुदरत ने अपना विषाद,
आक्रोश के रूप में
खंडिता नायिका का चोला पहन लिया।
*

करुणा

करुणा
- Kaushalya
इन सब की करुणा तो देखिये...
सूरज खुद तप कर,
अंधकार दूर कर के,
संसार को उजाला देता है

चाँद के पास जो शीतल रोशनी है,
वो खुद के पास न रखकर,
सारी सृष्टि को शीतलता प्रदान करता है

नदियों के पास अखूट जल स्रोत है,
वो अपने लिए न संचित कर,
जगत के कल्याण में बाँट देती है

फूलों से उसकी खुश्बू जुडी हुई है,
कभी भेद-भाव नहीं करते सौरभ बिखेरने में,
अपितु समग्र वातावरण को पुलकित कर देते है

प्रकृति में पेड़ की सहनशीलता तो देखिये,
खुद धूप में तप कर, मौसमी तूफ़ान झेलकर
हमे छाँव ,फल और आरक्षण देते है ।
*

सोमवार, 14 सितंबर 2009

ख्वाबों का जहाँन

ख्वाबों का जहाँन
- Kaushalya
ख्वाबों का जहाँन
किसी ने कहा सपना देखो,
उससे क्या लाभ,
....तो कहा कि....
जिन्दगी हसीन लगने लगेगी,
मन में जीने की ख्वाहिश होगी,
हर नज़ारा नया दिखेगा,
चारों तरफ खुशियाँ ही खुशियाँ होंगी,
हर कोई अपना लगेगा
किसी की तरफ एक नज़र उठाकर तो देख,
तुझे मोहब्बत ना हो जाये तो कहना,
....क्यों देखें....(?)
जब वो सच नहीं होनेवाला
क्यों जुठी तसल्ली दे अपने मन को,
जब सपना हक़ीकत से टकराता है,
उस वक़्त सपना चकना-चूर हो जाता है,
वो वास्तविकता का सामना नहीं कर सकता
उसकी हस्ती तो क्षणभंगूर मात्र है,
उसका साम्राज्य सिर्फ आँख खुलने तक ही सीमित है,
....उसके बाद....
*

शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

लगता है ऐसा

लगता है ऐसा
- Kaushalya
लगता है ऐसा
जैसे, ज़मीं रुक सी गयी है
हम थम से गए है
प्रकृति प्रगति के पथ पर है
ये कैसे हो सकता है
एक साथ चलनेवाले दोनों
उसमें एक आगे और एक पीछे
कैसे हो सकता है फिर एक
कब हुआ ऐसा..
जब किश्मत रूठ जाती है
खुशियाँ नज़रे चुराती है
ख्वाबों को अग्निदाह लग जाता है
सोच मूक हो जाती है
चित्त चिंता चुरा जाती है
तारामंडल से एक सितारा बिखर जाता है
हर वफ़ा जब बेवफ़ा कहलाती है
मध्याहन में सूरज प्रखरता से चलता है
मोमबत्ती पिघलकर प्रवाही में बह जाती है
पतंगा परवाना बन,
दिये की लौ पर फ़ना हो जाता है
समन्दर की लहरों में जब सुनामी उठती है
फूल डाली से मुरझाकर गिर जाते है
पतझड़ के झोंकों में पत्ते बिखर जाते है
....

गुरुवार, 10 सितंबर 2009

जब भी जी चाहे

जब भी जी चाहे
- Kaushalya
जब भी जी चाहे
मुझे तुम यादों में बुला लेना
सपना बन ना आऊं तो कहना

जब भी जी चाहे
तुम मुझे आवाज़ देना
पवन लहरी बन ना आऊं तो कहना

जब भी जी चाहे
तुम मेरी ख्वाहिश करना
अपना न बन जाऊँ तो कहना
*

सोमवार, 7 सितंबर 2009

जाना कहाँ ....

जाना कहाँ ....
- Kaushalya
रास्ता धूंधला है,
जाना कहाँ मालूम नहीं,
मंझील का पता नहीं,
ले जाये किस ओर....
ये कदम बढे जा रहे
अकेले है सफ़र में
फिर भी कोई ग़म नहीं
रस्ते में तूफ़ान का करेंगे सामना
लड़ लेंगे हर सितम से,
गर खुदाया तेरा साथ रहे
कोई ऋणानुबंध नहीं संसार से,
धुप- छाँव की पर्व नहीं,
ना किसी से कोई आश,
नाहीं किसी से गिले-शिकवे
बस अपनी धून में चलते ही जाये
मंझिल का पता नहीं
जाना कहाँ मालूम नहीं
कदम जिस ओर बढ़े
उस ओर बस चलते जाये
है जाना कहाँ मालूम नहीं
**

" राम "

" राम "
- Kaushalya
राम तेरा नाम, तेरा नाम_
एक जीने की सच्ची राह दिखता है,_
दूजा जीवन का उद्देश्य बताता है,_
वन में अहल्या का श्राप मुक्तकर,_
अपनी करुणा दिखाई ।_
पिता वचन की लाज रखकर,_
रघुकुल रीति निभाई।_
सीता का वरण करके,_
प्रीत की रित निभाई।_
भरत को राजगद्दी सोंपकर,_
भातृ के प्रति स्नेह बताया।_
चौदा वर्ष बनवास भोगकर,_
प्रभु ने त्याग की रीत शिखायी।_
मंथरा के अपराध को क्षमा कर,_
करूणानिधि ने क्षमा दान शिखलाया।_
गुहु को नदिया पार का मूल्य चुकाकर,_
शिष्टाचार से व्यवहार धर्म निभाया।_
शबरी के जुठे बेर खाकर,_
सच्ची चाहत को अमरता दिलवाई।_
सुग्रीव की प्राण रक्षाकर,_
रक्षण क्षत्रिय धर्म बताया।_
बजरंगबली के हृदय में रहकर,_
भक्ति की महिमा बढ़ायी।_
लंकेश्वर रावण का नाश कर,_
धर्म की रक्षा करना शीखाया।_
राज के धोबी के प्रश्न पर,_
प्रजा वत्सल ने न्याय की झाँकि दिखाई।_
सदगुणी रामजी को पाकर,_
समग्र धरती पावन हो गयी।_
मर्यादा पुरषोत्तम राम ने अपने द्रष्टांत से,_
हमे शिष्टाचार ग्यान देकर,_
सत्य का मार्ग दिखाया।_

" जय श्री राम जी "
*

रविवार, 6 सितंबर 2009

जुदा नहीं है

जुदा नहीं है
- Kaushalya
जिस तरह समन्दर से उसकी लहर जुदा नहीं
नदी से उसका किनारा
जैसे शब्द से उसका अर्थ
फूलों से उसकी सौरभ
जैसे दिल से धड़कने
जिस तरह रस्ते से उसकी मंज़िल
प्रार्थना से दुआ जुदा नहीं
जैसे पायल से उसकी आवाज़
चूड़ियों से उसकी खनक
पहाड़ों से उसकी अचलता
बच्चो से उसकी चंचलता
जैसे मोसम से उसकी बहारें
चाँद से उसकी चांदनी की शीतल रोशनी
जिस तरह पंछियों से उनका कलरव
जिस तरह ह्रदय से उसकी कोमलता
आकाश से उसकी विशालता
जिस तरह शारीर से आत्मा
जिस तरह तारों से उसकी टीम-टीम
मन से विचार जुदा नहीं
संगीत से उसकी मधुरता
गीतों से उसकी सरगम
जिस तरह दिवानों से दिवानगी जुदा नहीं
जिस तरह परमेश्वर से उसकी करुणा
कुंदन से उसकी एहमियत जुदा नहीं
इस तरह....
आपसे हमारा प्रेम जुदा नहीं
क्योकि,..
हम बने है एक दूजे के लिए ।
*

शनिवार, 5 सितंबर 2009

तू ही मेरा महबूब

तू ही मेरा महबूब
- Kaushalya
हर दुआ में तुम हो सामिल_
जब इबादत में खुदा की,_
ये हाथ उठाते हैं_
उस वक़्त इन आँखों में,_
एक ही चेहरा रहता है...._
होठों पर एक ही नाम रहता है_
हर दुआ में तू इस कदर सामिल है_
जैसे, फूलों में खुश्बू _
इस भरी महफ़िल के आलम में_
हर आहट तेरे आने की खबर देता है,_
नज़ाने कैसा है ये एहसास_
चेहरे पर गभराहट सी छायी हुई है
मन् में एक सूकुन की लहर बह रही है_
तेरे आगमन से महफ़िल रोशन हो गयी_
तेरे सजदे में ये कब से बेकरार है_
जैसे जान सी आ गयी और_
महसूस हो रहा है जैसे,_
जीवन जिंदगी से भरपूर है।
_____
ए ख़ुदाया मुझे माफ़ करना_
तेरी हर इबादत में पहले_
मेरा महबूब का नाम है सामिल,_
लगता है जैसे..._
महाबूब और रब में फ़र्क ही नहीं रहा।
*^*^*^*^*

साथी

साथी
- Kaushalya
जिन्दगी जीने का बहना ढूंढती है,
तेरे दिल में आशियाना ढूंढती है,
तू कहे अगर हाँ तो,
जीने का मगसद मिल जाये कोई,
नहीं तो राहों में पड़े है यूँही
गर तू कहे हाँ तो....
रुकने की वजह मिल जाये कोई,
खड़े है राहों में साथी,
तू मिले तो मंज़िल मिल जाये कोई .
~^~^~^~

ख़ामोश जज़्बात

ख़ामोश जज़्बात
- Kaushalya
बोलने की हमारी फ़िकरत नहीं,
जताने की हमारी आदत नहीं

निभायें जाते है रिश्तो को,
जो आए हमारे हिस्से,

नहीं किसी से कोई गिला
और नहीं शिकायत किसी से

बस यूँही मुस्कुराये जाते है
आपकी मुस्कुराहट के लिए ।
***

बुधवार, 5 अगस्त 2009

जा रे मेघ जा (Special For My Brother)

जा रे मेघ जा (Special For My Brother)

- Kaushalya

जा रे मेघ जा...

दूर मेरे भाई के , देश जा...

नील गगन में झूमते बादल

झूमकर मेरे भाई की गली जा

जा रे मेघ जा....


जा सन्देश दे मेरे भैया को

दूर बेठी बहना याद करे

जा रे मेघ जा....


राखी का त्योहर है आया

जा सन्देश देके आ..

जा रे मेघ जा....


पलके बिछाए पथ पर तेरे,

तेरी बहना राह तके है

जा उसको कह आ..

जा रे मेघ जा....


ख़ुशी के अवसर पर भैया,

बाँट न दिखलाना,

तुम जल्दी आजाना

जा रे मेघ जा...


दूर मेरे भैया के, देश जा

जा रे मेघ जा....

**

રક્ષાબંધન Special

રક્ષાબંધન Special
- Kaushalya

નથી લોહી ની સગાઈ
નથી સહોદર ભાઈ
તેમ છતાં આજ આપણે
ભાઈ-બહેન ના બંધને ગૂંથાયી ગયા
લાગે છે ઍમ
પૂર્વ જન્મ ના ઋણાનુબંધ થી
આજ વિધાતા ના લેખે કરી
પવિત્ર સંબંધ સ્થપાયી ગયા
નારિયેળી પૂનમ ના દિવસે
નથી કર્યા કોઈ પૂજન
પરંતુ,
ઉદિત સૂરજ નુ કુમ-કુમ તિલક કરી
કિરણો રૂપી અક્ષતથી વધાવી લીધા
લઈ લાગણી રૂપી રેશમની દોર
હૈયાની અંતર રૂપી કલાઈ પર
ભાવ કેરી રાખડી બાંધી દીધી
આજ રક્ષાબંધન ના શુભ અવસર પર
ભાઈ ઍ બહેન ને અને બહેને ભાઈ ને
યાદ કેરી ત્યોહાર ને વધાવી લીધા.
*********************

सोमवार, 27 जुलाई 2009

तुम ही हो

  • तुम ही हो

- Kaushalya

  • तुम्ही हो कल्पना मेरी, सपना भी तुम ही हो।
  • तुम ही हो प्रेरणा मेरी, मंज़िल भी तुम ही हो।
  • तुम ही हो आस्था मेरी, विश्वास भी तुम ही हो।
  • तुम ही हो खुशियाँ मेरी, भावना भी तुम ही हो।
  • तुम ही हो ख्वाहिश मेरी, चाहत भी तुम ही हो।
  • तुम ही हो दुआ मेरी, परमेश्वर भी तुम ही हो।
  • तुम ही हो ज़िन्दगी मेरी, सब कुछ मेरा तुम ही हो।
  • ..... बोले तो.....
  • तुम से ही है मेरा जहान रोशन।
  • *

रविवार, 26 जुलाई 2009

जवाब आयेगा

जवाब आयेगा
- Kaushalya
यूँही खत लिख दिया उनके नाम
जानते है हम कि
जवाब आएगा नहीं
फिर भी, इंतज़ार में है
सोचते है कि,
उन्होने लिफाफ़ा खोला होगा भी या नहीं
मन तो कहता है,
ज़रूर पढ़ा होगा खत
और मुस्कुराए होंगे वो
कौन जाने, क्या है हक़ीकत
मन बैचेन है,
कहीं खत पढ़कर वो नाराज़ ना हो जाए,
फिर भी, एक सुकून है,
ख़त पढ़ा तो होगा ।
बस यही काफ़ी है हमारे लिए
कोई उम्मीद नहीं रखी
के जवाब आयेगा
फिर भी तमन्ना ये रखते है
के जवाब आ जाए
कौन जाने,
क्या है उनके दिल में,
कुच्छ ख़बर नहीं
मन कहता है,
थोड़ा ठहर जा, ज़रा सा रुक जा,
इतना ही सही, तोड़ा और इंतज़ार कर ले
ज़रूर कुच्छ ना कुच्छ संकेत आयेगा उनका
जवाब ना आए तो कोई ग़म नहीं,
उन तक खत पहुँचा.. यही बहुत है
फिर भी, मन करता है,....
कि जवाब आ जाए....
****
**
*

कौन है हम उनके

कौन है हम उनके
- Kaushalya
वो पुच्छ रहे हम से
कौन है हम....
क्या जवाब दे उनको कि,
कौन है हम उनके....
कोई जाए और उनसे कहे कि,
उनके पास से गुजरनेवाली हवा है हम
साँसों मे जो घुल जाए वो खुश्बू है हम
उनके हृदय में छीपी चाहत है हम
तन्हाइयों मे आनेवाली याद है हम
उनके ग़म में बहनेवाले आँसू है हम
कोई जाए और कहे उनसे कि,
कौन है हम....
उनके इर्द-गिर्द होनेवाली,
चहल-पहल के साक्षी है हम
उनको होनेवाले एहसास की अनुभूति है हम
उनके दिल मे धड़कनेवाली धड़कन है हम
उनके जीवन में ,
मेघधनुषी रंगो का रंग है हम
कोई जाए और कहे उनसे..
कि कौन है हम उनके....
**

शनिवार, 25 जुलाई 2009

इलज़ाम है हम पर

इलज़ाम है हम पर
- Kaushalya
वो कहते है....
चुराया है हमने उनका नाम
इतना बड़ा इलज़ाम लगाया हमारे नाम
जैसे हमने....
आसमान के तारों को चुराकर, अपना दामन सजा लिया ।
फूलों से उसकी खुश्बू चुराकर, उनका नाम परिमल रख दिया ।
जैसे क्षीर सागर से मूल्यवान रत्न चुराकर,
उनका नाम अनमोल रख दिया
बन की खामोशी चुराकर, उनका नाम वनराज रख दिया
झीलों की शान्ति चुराकर, उनका नाम अमन रख दिया
जुगनुओं की रोशनी चुराकर, उनका नाम रोनक रख दिया
आकाश की विशालता चुराकर, उनका नाम अम्बर रख दिया
झूमते बादल की आकृति चुराकर, उनका नाम स्वरुप रख दिया
चंद्रमा की शीतल चाँदनी चुराकर, उनका नाम ब्रीजेश रख दीया
ेदों की ऋचाओं ने अवतार लिया
ओमकार के रूप में , और
ओमकार का नाद चुराकर, उनका नाम सोहम् रख दिया
कमल की कोमलता चूराकर, उनका नाम पुष्कर रख दिया
पर्वतो का अल्लड़पन चुराकर, उनका नाम हिमालय रख दिया
रिश्तो की नजाकत चुराकर, उनके साथ रिश्ता जोड़ लिया
ह्रदय की भावनाओं से चाहत चुराकर
उनका नाम प्रेम रख दिया
....क्या सही किया,....
उन्होंने हम पर नाम चुराने का
यह इलज़ाम लगाकर
हमे गुनाहगार का खिताब दे दिया।
****

हम-तुम

हम-तुम
- Kaushalya
आपका आना लगता है कैसा
सच कहु या चुप रहु
कुच्छ समझ में ना आए
कैसी मुश्किल है ये
जानते है वो भी
और जानते है हम भी
नहीं बोले गये जो शब्द
आप बताए हल इसका क्या
मन में खुश है वो भी
पर है खामोश खड़े
ये देखते ही
इतराते है हम भी
जादू है जैसे कोई
उनके आगमन में..
*

मुखौटा : चेहरे पर चेहरा

मुखौटा : चेहरे पर चेहरा
- Kaushalya
क्यों विश्वास के नाम से
होता है विश्वासघात

क्यों सच्चाई के नाम पर
होते है जूठ के सवालात

क्यों भरोसे के नाम पर
होता है धोखा

क्यों महोब्बत के नाम पर
होता है दिखावा-छल

क्यों दिल तोड़ते है
वफ़ा के नाम से

क्यों दिल्लगी करते है
दिल लगाने के नाम से

क्यों हक़ीकत के नाम से
करते है अभिनय

नाहीं रुकती है और
नाहीं बढ़ती है

वहीं की वहीं ठहरकर जिंदगी
क्यों पुनरावर्तित होती है।
*

तुम्हारी याद

तुम्हारी याद
- Kaushalya
जब बात कोई निकले,
मुझे तुम याद आए
जब ज़िक्र किसिका हो, मुझे तुम याद आए
ना जाने हर बात पर, मुझे तुम याद आए
कहीं ख्वाब कोई देखा, मुझे तुम याद आए
जब सुनी कोई सरगम, मुझे तुम याद आए
शमा की हर शै पर , मुझे तुम याद आए
मौसम के हर रुख़ पर, मुझे तुम याद आए
खुशियाँ ही खुशियाँ हो जब, मुझे तुम याद आए
एहसास नया हो जब, मुझे तुम याद आए
तन्हाइयों में जब मेरी, मुझे तुम याद आए
ये आँख हुयी नम तो, मुझे तुम याद आए
आहट सी कोई आये तो, मुझे तुम याद आए
मेरी सोच की गहराई में, मुझे तुम याद आए
मेरी उलझी हुई दुनिया देख,
मुझे तुम याद आए ।
*

અષાઢી મેઘ

અષાઢી મેઘ
- Kaushalya
ભીની માટી ની સોડમ આવે,
મને બચપન ની યાદ સાંભરી,

આજ આ ખુશનુમા મૌસમ માં
મન મૂકી ઝૂમવા ચાહે,

મન પ્રફુલ્લિત છે આજ,
ભીંજાય જાવ આજ મન મૂકી

ઝરમર મેહ વરસે આજ,
માટી ની મહેક પ્રસરી રહી

અષાઢની રઢિયાળી રાત માં,
મન પણ તેના રંગ માં રંગાવા ચાહે....
****

शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

बरखा : मौसम - ऐ - शरारत

बरखा : मौसम-ऐ-शरारत
- Kaushalya

  • करवट बदली मौसम ने,
  • और अंगडाई ली हवाओं ने
  • लहरायी चुनरियाँ बदलो ने,
  • आसमान में फैलाया आँचल
  • धरती ने सज़ा रूप नया
  • चारों तरफ फैली हरियाली
  • देखो वो....
  • उमड़-घूमड़ बादल दौड़े आ रहे
  • बिजली ने भी मृदंग नाद छेड़ दिया
  • पवन ने भी तूफान का रूप धारण कर लिया
  • मोहे लागे प्यारे ये सब नज़ारे
  • शरारत तो देखिए मौसम की,
  • झूमता हुआ सावन आया
  • याद ले आई आपकी
  • मन चाहे कि....
  • ये उमड़-घूमड़ बदलियाँ
  • ले आए आपको हमारे पास
  • और मेघ बन बरसे आप का स्नेह
  • बारिस की बूँदो ने, छेड़ दिए मान के तार
  • जी चाहे....ये शमा यही ठहर जाए
  • मंद-मंद पवन मे लहराई है झुल्फ,
  • कुन्तल पर बूँद सजी कुंदन की।
  • मयूर की तरह थिरकट लेता हुआ
  • आया सावन चित्त चुराने
  • प्रफुल्लित हो उठा मेरा मन
  • आयी ऋतु रंग सजाने की,
  • प्रकृति से मन तक पहुँचने की।
  • ***

અવસર (अवसर)

અવસર
- Kaushalya
અવસર મડ્યો આજ ગુમવવો નથી,
બે મીઠી વાત કરી લવ તમારી સાથ.
આ અમૂલ્ય ક્ષણ હવે વેડફવી નથી,
યાદગાર બનવી લવ મારી આ સ્મૃતિ.
અવસર આવો મડે ના ફરી,
આવ કરિશ્મા સર્જાતા હોય છે કદી.
********
अवसर
- Kaushalya

अवसर मिला है आज गुमाना नहीं,
दो मीठी बात कर लू आपके साथ।

ये अमूल्य क्षण अब गवाना नहीं है ,
यादगार बना लू अपनी ये स्मृति।

अवसर ऐसा मिले न फ़िर से,
ऐसे करिश्मा सृजन होता है कभी।

*

सोमवार, 20 जुलाई 2009

आपका आना

आपका आना
- Kaushalya
सुरमयी शाम लाती है रात का पैगाम ,
होती है हर रात की सुबह नयी,
भोर से होती है हर दिन की शुरुआतनयी,
वैसे ही....
आप आए सुबह की भोर बनके,
और मेरे जीवन की हुयी शुरुआत नयी।
(*_*)

कविता की रचना

कविता की रचना
- Kaushalya
पुराना ही ये स्वर है,
अंकुर फूटे मन् में,
इसलिए लगता नया है।
वही है शब्द भंडार,
इर्द-गिर्द बिखरे शब्द,
पिरोये एक माला में,
बन गई नयी सचना,
उसका नाम रखा कविता।
***

रविवार, 19 जुलाई 2009

सवेरा

सवेरा
- Kaushalya
कितना हसीन है मौसम,
परिंदों के कलरव से उठा सवेरा,
रंग-बे-रंगी आसमान से आच्छादित सृष्टि सारी,
सूर्योदय की किरणों ने बिखेर दिया अपना साम्राज्य,
शबनम ने लहरायी अपनी भीगी चुनरियाँ,
मन्द-मन्द समीर के झोंके आ रहे,
मयूर की आवाज़ से गूंज उठा सवेरा,
फूलों ने मुस्कुराकर अपनी खुश्बू बिखेर दी,
मन्दिर की घंटी का मधुर स्वर है दिशाओं में,
वातावरण की हलकी शान्ति ने चित्त चुराया,
खुशनुमा नज़ारा देखते ही मन् प्रफुल्लित हो उठा।
^_^

सोमवार, 29 जून 2009

कश्मकश है क्या लिखू (For Blessing)

कश्मकश है क्या लिखू
- Kaushalya
लिखू तो मैं क्या लिखू ,
तुम्हारे नाम......
ये खुला आश्मान लिखू ,
या तारो से झग-मगाती हुई रात लिखू....
फूलो की महक लिखू ,
या हवाओं की रवानी लिखू....
तुम्ही कहो अब मैं क्या लिखू....
सोचा है की,....
सूरज की पहेली किरण का सलाम लिखू,
देखो तुम्हारी राह में,.....
इन्तज़ार करते हुए पहाडों की मृदंग नाद लिखू,
किल-किलाहत करती हई नदियों की मुस्कान लिखू,
या समन्दर की गहेरायी लिखू,
मौसम में तुम्हारे आने की खुशबु का पयाम लिखू,
या तितलियो का मेघ-धनुषी रंग लिखू....
उषा के फैले आशमान में,
रंग-बे-रंगी रंगों की सौगात लिखू,
या चाँद की रोशनी से बनी हुयी आभा लिखू....
देखो ना,....
आदित्य की कुंदन जैसी किरण,
जैसे सृष्टि में नवचेतना भर देती है,
वैसे ही,......
आज का ये दिन जीवन में नव-पल्लवित सवेरा लाये....
~*~*~*~*~*~

Who is God , What is his identity

[1]
God Means Endless Why
- Kaushalya
The God's power existence or not ....
There comes a voice from inside ....
I do not know that.
what people are think,
We thinking that
However ....
We do not deny his presence ....
Because, They do makes Feeling
Realize is alive in us.
I do not know who is the Head of the world,
who handles the reins of the government ....
why is They get a realize of focus.
When we have not seen him ... did not hear ...
Yet, why we do not deny his accept existence..
Otherwise, Is happy to accept the selection,
And He is on leave all ...
Why ....
Endless why....
?
________________________
[2]
Platform Of The God
- Kaushalya
Maybe God The waste is in the nature
Our sense is
Wave in the river
Birds singing in the
Is in the soil of the earth
Is in the fragrance of flowers
In light of the moon
The stars twinkle in the
Trees and plants in
Rain drops in
Waving in the field
In the throb of hearts
In the rays of the sun
Maybe God,
All have extensive...
He particles - the particles have spread.
^_^

ईश्वर का अस्तित्व

[1]
ईश्वर का अस्तित्व
- Kaushalya
जहाँ सवाल उठता है की....
ईश्वर की सत्ता की अस्तित्व है भी या नहीं....
वहां अन्दर से एक आवाज़ आती है....
की पता नहीं.
नजाने लोग क्या सोचते है,
हम क्या सोचते है
फिर भी....
हम उसकी मौजूदगी को नकारते नहीं....
क्योकि वो अपनी अनुभूति करवा कर ,
हमारे एहसास में जिन्दा हो जाता है.
पता नहीं....दुनिया किसके नेतृत्व पर चलती है
मालूम नहीं कोन है इसका कर्ता,
कोन संभालता है इसके शासन की बागडोर को....
वो अपनी अनुभूति की प्रतीति क्यों करवाता है.
जब की हमने उसे देखा नहीं...सुना नहीं...
फिर भी हम उसकी हाजरी को नकारते क्यों नहीं...
वरण सहर्ष स्वीकार करते है,
और उस पर ही सब छोड़ देते है...
क्यों....
आखिर क्यों....
*
______________________________________________________
[2]
ईश्वर की पहचान
- Kaushalya
ईश्वर शायद
इस प्रकृति में बसा हुआ है....
हमारी अनुभूतियों में है...
नदियों की लहेरो में है....
गाते हुए पंछियो में है....
धरती की मिट्टी में है....
फोलों की खुशबू में है...
चाँद की रोशनी में है...
तारों की टीम-टीम में है...
पेड़ - पौधों में है....
बारिश की बूंदों में है...
लहराते हुए खेतो में है...
दिलों की धड़कन में है....
सूरज की किरणों में है....
ईश्वर शायद,
सर्व व्यापक है...
वो कण-कण में समाया हुआ है।


*

रविवार, 28 जून 2009

Shama changed little changed this, everything is like new

Shama changed little changed this, everything is like new
- Kaushalya
Where did it come from a change
How come, I do not know
But as it is feeling good
Sound world is changed,
Happiness looks around.
The changes you are seeing
We feel these changes are
Brightness is strange
All Direction,all in the air
Everything is changing.
Is changing the color of the flowers
Everybody is shocked,its that is feel..
Think how it happened,
When these changes
As feel that Stars on the floor ,
And spread the light around
Spread the moon has its moonlight
You also Tell me what felt
These changes ....
Do not know ... What happened to the world,
Or is cheating of our eyes
These changes ....
^_^

बदला बदला सा ये शमा ... सब कुछ है नया सा

बदला बदला सा ये शमा ... सब कुछ है नया सा
- Kaushalya
बदलाव कहाँ से आया....
कैसे आया....पता नहीं....
पर जैसा भी है....अच्छा है.
दुनिया बदली बदली सी लगती है,
खुशियाँ चारो ओर दिखती है.
ये बदलाव....आप भी देख रहे है
हम भी महसूस कर रहे है ये बदलाव
अजीब चमक सी है....
दिशाओ में ...फिज़ाओ में....
बदल रहा है सब कुछ.
बदल रहा है फूलों का रंग
सब हेरान है , ये जो महसूस हो रहा है
सोचते है...ये कैसे हुआ,
कब हुआ.....ये बदलाव....
लगता है ये ....सितारे ज़मीन पर हो,
और चारो ओर फैला उजाला
चाँद ने बिखेर दी अपनी चांदनी
आप भी बताईये क्या महसूस हुआ
ये बदलाव....
ये ज़मीं को ...नजाने क्या हो गया,
या हमारी नजर का धोका है
ये बदलाव....
*_*

Oh God....

Oh God....
- Kaushalya
Oh God,
I want your love
They take that desire,
You are always with me
I need you
Oh God,
So for you to be thousands
You have the same support for me
You do not leave my side
Take hold my hand,

And take me in your lap
Oh God,
This is your world seems like a stranger to me,
I added the relationship with you
You keep me in your shelter
Oh God,
Look there in the world where this
Delusion, deception, and fraud-flam is full
I deal with all this heat,
Is not as much strength in me
Oh God,
You have my support
You have my
Am unable to live without you,
Oh God,
I bring you your
I am dependent only on you
Rescue me from this world

I have hidden in their own.
*

हे इश्वर....

हे इश्वर....
- Kaushalya
हे इश्वर,
मैं चाहू तेरा प्यार
ये तमन्ना रखू कि,
तू रहे हरदम मेरे साथ
मुझे जरुरत है तेरी
हे इश्वर,
तेरे लिए तो होंगे हज़ारों
मेरे लिए तू एक ही है सहारा
तू छोड़ ना न मेरा साथ
हाथ पकड़ ले मेरा ,
और उठाले मुझे अपनी गोद में
हे इश्वर,
तेरा ये संसार लगता है है मुझे अजनबी सा,
मैं तुम्हारे साथ नाता जोड़ लू
तू रखना मुझे अपनी पनाह में
हे इश्वर,
ये संसार में जहाँ देखो वहां
प्रपंच, धोखा, और छल-कपट भरा पड़ा है
मैं इन सब से निपट लू,
उतना सामर्थ्य नहीं है मुझ में
हे इश्वर,
तू ही मेरा एक सहारा है
तू ही मेरा अपना है
तेरे बगैर में जीने में असमर्थ हूँ,
हे इश्वर,
तू अपना ले मुझे
मैं तेरा ही मोहताज हूँ
बचाले मुझे इस संसार से
छुपा ले मुझे अपने आप में ।
*

शनिवार, 27 जून 2009

Treasure of Heart

Treasure Of Heart
- Kaushalya
''Always Keep smiling like these flowers
As the colors of these flowers,
Fill deep color in your life ...
So many obstacle will comes in your ways ...
But you keep smiling like these flowers ....
Being in the thorns do not leave flowers smile
you remain spread like this fragrances of the flower
All their flavor, the mind is happy ....
Even if the person, or God, or any mere creature,
The fragrance of these flowers, like all of the soul is satisfied,
Same as like your "smile"....
Flowers are delicate and soft, so you
Keep your heart's feelings the soft ....
So that whoever you met
That "you" to be ...."
*

मन का खज़ाना

मन का खज़ाना
- Kaushalya

'इन फूलो की तरह मुस्कुराते रहना हर दम....
इन फूलो के रंग जैसा ,
रंग भरना अपनी जिंदगी में गहरा...
काँटे तो अनेक आयेंगे राहों में,
पर आप मुस्कुराते रहना....इन फूलो की तरह....
फूल काँटों में रहकर भी मुस्कुराना नहीं छोड़ते ,
आप इन फूलो की खुश्बू की तरह महकते रहना....
जो सब को अपनी परिमल से , प्रसन्न चित्त करता है ...
चाहे वो इन्सान हो,या परमेश्वर, या कोई भी जीव मात्र,
ये फूलो की महेक,जैसे सब को आत्मा-तृप्त करती है ,
वैसी ही आपकी " मुस्कुराहट " हो....
फूल जैसे नाजुक और कोमल होते है ,वैसे ही आप
अपने ह्रदय की भावनाओ को " कोमल " रखना...
ताकि जो कोई भी आप से मिले
वो " आपका " हो जाये....'

*

अनुरोध (My Insistence For You)

अनुरोध (My Insistence For You)
- Kaushalya
तुम अपना जीवन शुद्ध जीना ,
तुम्हारी राह में जो कोई भी आए,
और मदद का हाथ फैलाये,
तो उसकी मदद करना ऐ दोस्त,
चाहे बस यही एक वादा तुमसे,
दे दो या ठुकरा दो हमारी गुजारिस को,
शिकवा नही करेंगे कोई तुमसे,
ये जीवन है कुंदन जैसा ,
गवाना मत्त उसे, क्योंकि....
कल ये मौका फ़िर मिले न मिले।

~*~

Student Life Is The Golden Period Of Life


Student Life Is The Golden Period Of Life
( विध्यार्थी अपने आप ही अपने भविष्या का निर्माण करे )
विध्यार्थी जीवन , जीवन का सुवर्णकाल है Student Life Is The Golden Period Of Life. कुच्छ सीखने को , कुच्छ बनने का निरंतर प्रयास इस समय मे ही होता है एक विध्यार्थी के क्या लक्षण होते है , यह नीचे के श्लोक मे दिए गये है ------
" काकचेष्टा बकध्यानम श्वाननिंद्रा तथैव च ।
अल्पाहारी गृहत्यागी विध्यार्थी पन्चलक्षम ॥ "
[1] काक (कौआ) चेष्टा :- कौआ दूर आशमान मे स्वच्छंदता से उड़ाता रहता हो फिर भी उसकी तीव्र द्रष्टि द्वारा ज़मीन पर पड़ी हुई कोई खाध्यपदार्थ को देख कर चपलतापूर्वक वहाँ पहुँच जाता है तथा अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेता है। एसे ही विध्यार्थी भी ज्ञान की प्राप्ति के लिए तीव्र जिज्ञासा रखे तथा अपना लक्ष्य को प्राप्त करता जाय ।
[2] बकध्यानम :- बगुला (Heron) तालाब या नदी किनारे एक पैर (Leg) पर खड़ा रहकर ध्यान मग्न रहता है। मछली देखते तुरंत ही उसे झपट कर अपना आहार बनता है , फिर दुबारा ध्यानस्थ मुद्रा मे हो जाता है। विध्यार्थी भी विद्या अध्ययन में लगे रहे तथा ज्ञान-विज्ञान की बातों को ग्रहण करता हुआ निरंतर प्रगति पथ पर बढ़ता रहे।
[3] श्वान निंद्रा :- जिस तरह सोते हुए कुत्ते के पास से धीरे से भी पसार (धीरे से निकलना) होते हो फिर भी वह जाग (उठ जाना) जाता है , इस तरहा विध्यार्थी भी अपना जीवन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सदाय (हमेशा) सावधान और जागरूक (Alert) रहे। एसी निन्द ' सात्विक ' है।
[4] अल्पाहारी :- विध्यार्थी जीवन ' साधना ' और ' तापश्चर्या ' का जीवन है। एक अध्ययनशील विध्यार्थी सदाय सादा सात्विक और अल्पभोजन लेनेवाला होता है। तामसिक , राजसिक और ज़्यादा आहार लेनेवाले विध्यार्थी की जीवन-शक्ति का ज़्यादातर भाग भोजन पचाने मे , नींद , आलस और तन-मन की बीमारियों का सामना करने मे खर्च हो जाता है। विध्यार्थी जीवन की सफलता के लिए स्वास्थ्य के प्राकृतिकनियमो का पालन अति आवश्यक है।
[5] गृहत्यागी :- एक आदर्श विध्यार्थी विध्या प्राप्ति के लिए गृहत्याग मे ही संतोष मानता है। विध्या प्राप्त करना ये एक तप करने जैसा है , नहि के मोज-मस्ती करने जैसा। सुख का त्याग आवश्यक है।
* * * * *
GOD BLESS YOU

साईं बाबा कृपा करना

साईं बाबा कृपा करना
- Kaushalya
राम नाम से पत्थर भी तर जाते है समन्दर में ,
साईं राम नाम से संसार रूपी सागर तर जायेंगे।
एक बार साईं राम नाम का रटन करके तो देख ,
दौडे आयेंगे साईं राम तेरी बिगड़ी बनाने के वास्ते।
एक बार पुकार के तो देख बन्दे ,
साईं नाम आज़मा के तो देख।

* * *